दक्षिण भारत में नीलगिरी पहाड़ियों पर आपको 12 साल में सिर्फ एक बार खिलने वाला फूल मिलेगा. नीलाकुरिंजी फूल. नीले रंग का ये फूल बेहद खूबसूरत होता है. जिसे देखते ही हर कोई मोहित हो जाए. लेकिन यह फूल आम फूलों से अलग है. जो इसे बेहद ख़ास बनाता है.

नीलाकुरिंजी फूल, मुन्नार की पहाड़ियों पर खिलता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये फूल 12 साल में सिर्फ एक बार ही खिलता है. इसे देखने के लिए दुनियाभर के लोग यहां पहुँचते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि नीलाकुरंजी फूल एक बार खिलने के बाद सूख जाते हैं, लेकिन उनके बीज उसी स्थान पर रहते हैं. इन बीजों से दोबारा फूल खिलने की प्रक्रिया में 12 साल लग जाते हैं. एक बार इन फूलों के खिलने के बाद पूरा इलाका नीले रंग में नजर आता है. फूलों का मौसम अक्टूबर तक रहता है. पिछली बार ये फूल साल 2018 में खिले थे.

इससे पहले साल 2006 में मुन्नार की पहाड़ियों पर नीलकुरिंजी का फूल खिले थे. मुन्नार में पूरे देश में सबसे ज्यादा नीलकुरंजी के पौधे हैं. ये पहाड़ियों के 3000 हेक्टयर क्षेत्र में फैले हुए हैं. हर पौधा अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार खिलता है और फूल खिलने के बाद ख़त्म हो जाता है. बीज को फिर से पौधा बनने में और बड़ा होने में करीब 12 वर्षों का लंबा वक्त लग जाता है.

नीलकुरंजी का फूल रिंजी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है. यह स्ट्रोबिलैंथस प्रजाति का पौधा है. पूरी दुनिया में स्ट्रोबिलैंथस की 450 प्रजातियाँ पाई जाती हैं. जिसमें से 146 भारत में मिलती हैं. अकेले केरल में इनकी 43 प्रजातियां पाई जाती हैं.

नीलकुरंजी का फूल खिलते ही तितलियों और मधुमक्खियों का झुंड लग जाता है. नीलकुरिंजी का शहद बहुत ख़ास होता है. यह 15 वर्षों तक ख़राब नहीं होता है. इस शहद में औषधीय गुण भी होते हैं. मुन्नार के अलावा कर्णाटक के वेस्टर्न घाट और तमिलनाडु के नीलगिरी पर्वत पर यह फूल खिलते हैं.

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