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राधामनी केपी एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है जिन्होंने अपने काम के जरिे एक रियल हीरो के काम को परिभाषित किया है, वो पिछले 8 साल से लगभग 30 से अधिक पुस्तकों के साथ अपने गांव के आसपास घूमती है, यहां तक की छुट्टी वाले दिन रविवार को भी घरों की महिलाओं को पुस्तकालय की पुस्तकें बांटने का काम करती हैं.

राधामनी केरल के वायनाड में प्रतिभा लाइब्रेरी में काम करती हैं. द न्यूज मिनट से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने वाकिंग लाइब्रेरियन बनी हैं तब से वो ये काम कर रही हैं. उनके गांव की महिलाएं आम तौर पर मनरेगा योजना के तहत काम करती हैं, ऐसे में वो रविवार को घर में होती हैं और इस तरह उनके लिए किताबों को पढ़ने का सबसे अच्छा समय होता है.

मूल रुप से वायस आफ रुरल इंडिया के लिए अपनी कहानी को लिखते हुए राधामनी कहती हैं कि पहले तो इन महिलाओं को केवल मंगलम और मनोरमा जैसी स्थानीय पत्रिकाएं के अलावा किताबें पढ़ने में ज्यादा दिलचस्पी ती. लेकिन उनके इस प्रयास के बाद लोगों ने उपन्यासों में दिलचस्पी लेनी शुरु कर दी है.

केरल स्टेट लाइब्रेरी काउंसिल ने वाकिंग लाइब्रेरियन की पहल को शुरु किया. जो गांवों की महिलाओं को पढ़ाने और पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का काम करती हैं. वो अपने पति की दुकान में भी हाथ बंटाने का काम करती हैं.

राधामनी प्रत्येक दिन सुबह साढ़े पांच बजे अपने काम को शुरु करती है और वो लाइब्रेरी जाने से पहले अपने घर के काम को पूरा कर लेती है. वह इस दौरान अपने पति को एक छोटी सी दुकान चलाने में भी मदद करती हैं.

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