कुछ लोग बिल्ली को अशुभ मानते हैं. बिल्ली के दिखने या रास्ते से उसके निकलने पर माथे पर शिकन आ जाती है. लेकिन कर्नाटक में एक ऐसा मंदिर है जहां बिल्ली की पूजा की जाती है. यह परंपरा एक हजार साल से चली आ रही है. यानि पिछले 1000 साल से बिल्ली की पूजा इस मंदिर में की जा रही है.

यह मंदिर कर्नाटक के मांड्या जिले से 30 किलोमीटर दूर बेक्कालेले गांव में स्थित है. इस गांव का नाम कन्नड़ के बेक्कू शब्द पर पड़ा है, जिसका अर्थ है बिल्ली. गांव के लोग बिल्ली को देवी का अवतार मानते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं.

गांव के लोग बिल्ली को देवी मनगम्मा का अवतार मानते हैं. मान्यताओं के मुताबिक देवी मनगम्मा ने बिल्ली का रूप धारण कर गांव में प्रवेश किया था और बुरी शक्ति से गांव वालों की रक्षा की थी. उस जगह पर बाद में एक बांबी बन गयी थी. तभी से यहां के लोग बिल्ली की पूजा करते हैं. या बात आपके लिए थोड़ी अजीब जरुर हो सकती है, पर है बिल्कुल सच.

इस गांव के लोग बिल्ली की हमेशा रक्षा करने में विश्वास रखते हैं. अगर कोई बिल्ली को नुकसान पहुंचाता है तो गांव से बाहर कर दिया जाता है. गांव में हर साल देवी मनगम्मा का धूमधाम से त्यौहार मनाया जाता है.

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