समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि देश का किसान आंदोलित है और भारत सरकार उनके मन की बात सुनने के बजाए अपने मन की बात थोपने पर लगी हुई है. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी 14 दिसंबर को किसानों के समर्थन में धरना देगी.

अखिलेश यादव ने कहा कि यह तो सभी मानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है. अहंकारी भाजपा याद रखे यहां ‘प्रधान‘ शब्द तक ‘कृषि‘ के बाद आता है. सत्ताधारी न भूलें कि हमारे देश में किसान ही प्रथम है और प्राथमिक भी. किसान अपना हक मांग रहे है, वे दृढ़ निश्चयी हैं कि वे इसे लेकर रहेंगे.

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुमत का रोडरोलर चलाकर अन्नदाता समुदाय की आवाज को कुचलने का कोई भी प्रयास उचित नहीं ठहराया जा सकता है. किसान अपने हित अनहित को समझकर अगर सरकार के कृषि विधेयकों के खिलाफ राय दे रहा है तो उसकी मांगे माने जाने में क्या दिक्कत हो सकती है.

अखिलेश यादव ने कहा कि सच्चाई यह है कि किसान एकजुट हैं, उनका आंदोलन बढ़ता ही जा रहा है. इसमें किसान परिवारों के बूढ़े-बच्चे-महिलाएं तक शामिल हैं जो इस ठण्ड के मौसम में आज 18वें दिन भी आंदोलनरत है.

सपा मुखिया ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसानों की मांगो का समर्थन करती है. उसकी सहानुभूति किसानों के साथ है. समाजवादी पार्टी की 7 दिसम्बर 2020 से किसान यात्राएं चल रही है और 14 दिसम्बर 2020 को वह किसानों के समर्थन में धरना भी देगी.

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