उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि डीएनए टेस्ट से ये साबित हो सकता है कि पत्नी बेवफा है या नहीं. अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी जिस शख्स ने अपनी तलाकशुदा पत्नी के बेटे को अपना बेटा होने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि ये मेरा बेटा हो ही नहीं सकता.

हमीरपुर के दंपति का फैमिली कोर्ट से तलाक हो चुका है. तलाक के तीन साल बाद उसकी पत्नी से मायके में एक बच्चे को जन्म दिया और दावा किया कि ये बच्चा उसके पति का ही है. जबकि पति ने इससे इंकार करते हुए कहा कि उसकी पत्नी और उसके बीच कोई शारीरिक संबंध बने ही नहीं.

पति के अनुसार वो 15 जनवरी 2013 से अपनी पत्नी के साथ नहीं रह रहा था. 25 जून 2014 को दोनों का फैमिली कोर्ट में तलाक हो गया.

उसने दावा किया कि उसके और उसकी पत्नी के बीच 15 जनवरी 2013 से कोई संबंध नहीं बने. तलाक के बाद पत्नी मायके में रहने लगी.

26 जनवरी 2016 को उसने एक बच्चे को जन्म दिया. पति कह रहा है कि बच्चा उसका नहीं है जबकि पत्नी का कहना है कि बच्चा उसका ही है.

हाईकोर्ट ने आज इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ये साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट ही सबसे बेहतर तरीका है. अदालत ने ये भी कहा कि डीएनए टेस्ट से ये भी साबित हो सकता है कि पत्नी बेवफा है या नहीं.

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