सीडीएस जनरल बिपिन रावत जिस MI-17V5 हेलीकाप्टर में सवार थे. उसके क्रैश होने के कारणों की जांच शुरु हो गई है. हेलीकाप्टर का ब्लैक बाक्स बरामद कर लिया गया है इस हादसे में 14 लोगों में से केवल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही जीवित बचे हैं. हालांकि वरुण सिंह की हालत बेहद नाजुक है और उन्हें लाइफसपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है. एयर कमोडोर बीएस सिवाच का कहना है कि इस मामले की जांच में कई पहलुओं का ध्यान रखना होगा. कई सवाल ऐसी भी हैं जो तकनीकी जांच से परे दिखाई दे रहे हैं. जसे जनरल बिपिन रावत से कौन ड़रा हुआ था, कौन नाराज था.

अमूमन चीन और पाकिस्तान को लेकर सीडीएस की नीति व बयान आक्रामक रहे हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हेलीकाप्टर कम ऊंचाई पर था. उसके नीचे गिरने के बाद ही उसमें आग लगी. बल्कि उंचाई पर ही लपटें नजर आ रही थी. ब्लैक बाक्स, एफडीआर और एटीसी के साथ बातचीत में मिड ब्लास्ट, आगजनी, डक या नाराजगी जैसे कारणों का पता लग सकेगा. जांच टीम को कम ऊंचाई के बादलों पर गौर करना होगा.

वहीं एक प्रत्यक्षदर्शी ने मीडिया को बताया कि उसने आसमान से लोगों को गिरते हुए देखा था. दूसरे लोगों का कहना है कि हेलीकाप्टर से लोग गिरे थे, वो आग की लपटों से जूझ रहे थे. एयर कमोडोर बीएस सिवाच ने बताया जिस जगह पर जनरल रावत का हेलीकाप्टर क्रैश हुआ है, वहां से 10-12 किलोमीटर की दूरी पर वेलिंगटन में हैलीपैड बना था. ये हैलीपैड बाल टाइप का है इसकी तीनों ओर पहाड़ी है.

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वहां मौसम का मिजाज हर पल बदलता रहता है. विंटर मानसून में कहां, किस ओर से कब बादल आ जाए, कुछ पता नहीं होता. कम ऊंचाई पर बादल बहुत तेज गति से आते हैं. कई बात तो तीन-चार मीटर की दूरी पर कुछ नजर नहीं आता है ऐसे में जांच टीम को इस अहम पहलू पर गौर करना होगा. इस सवाल के जवाब में कि क्या इस घटना के पीछे कोई शरारत हो सकती है, कमोडोर सिवाच का कहना है जनरल रावत से खासतौर पर पड़ोसी देश, मसलन चीन और पाकिस्तान ड़रे हुए थे, नाराज थे.

बिपिन रावत ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जिस तेजी के साथ शुरु की थी, उससे पड़ोसी देशों की सरकारें परेशान थे. कुछ लोग कह रहे हैं कि हेलीकाप्टर कम ऊंचाई पर था और आसमान में ही उससे आग की लपटें निकल रही थी, जांच टीम को ये प्वाइंट देखना पड़ेगा. अगर आसमान में ही हेलीकाप्टर जला है तो कहानी कुछ और हो सकती है. ये बात उस समय और भी ज्यादा मायने रखती है जब दूसरे चश्मदीद ये कह रहे हैं कि हादसे से पहले हेलीकाप्टर बहुत कम ऊंचाई पर उड़ रहा था. एकाएक वो नीचे की तरफ आया और कटहल के पेड़ से टकरा गया.

जब हेलीकाप्टर क्रैश हुआ तो उस वक्त मौसम पूरी तरह साफ था. साफ मौसम में हादसा होना, इसे बहुत गंभीरता से लिया जाता है. साजिश या शरारत, ये एंगल भी जांचा जाएगा. ब्लैक बाक्स से सौ फीसदी जानकारी मिल जाती है.

एयर कमोडोर बीएस सिवाच ने कहा, इसमें पायलट की पूरी बातचीत रिकार्ड रहती है एटीसी के साथ हेलीकाप्टर को लेकर क्या बात हुई, कोई सिग्नल भेजा गया, हैलीपैड पर कोई दिक्कत रही, क्या कम ऊंचाई को लेकर कोई समस्या आई, हेलीकाप्टर का बैक एंगल, चापर की स्पीड, ऊंचाई, पावर, आरपीएम ये सब जानकारी ब्लैक बाक्स व दूसरे रिकार्डिंग उपकरण एफडीआर रिपोर्ट, डेटा रिकार्डर व वायस रिकार्डर की मदद से मिल सकती है.

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