महागठबंधन के नेता और सुल्तानगंज से कांग्रेस प्रत्याशी रहे ललन कुमार यादव ने आज संवाददाता सम्मेलन में केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार कह रही है कि निजी क्षेत्र के आने किसानों को फायदा होगा, ये दीर्धकालिक नीति है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो हमारा राज्य बिहार जहां सरकारी मंडी व्यवस्था 2006 से ही खत्म कर दी गई है, वहां हालात बेहतर हो जाने चाहिए मगर ऐसा हुआ नहीं.

ललन कुमार ने कहा कि अगर सरकार की बात मान ली जाए तो सवाल ये उठता है कि बिहार में कितना निवेश आया, यहां किसानों की स्थिती कितनी बेहतर हुई. अगर बिहार में कृषि क्रांति आई तो यहां मजदूरों के पलायन का दर्दनाक चेहरा क्यों दिखाई दिया. कृषि के क्षेत्र में बिहार अग्रणी राज्य क्यों नहीं बना.

कांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार में कोई 1200 रूपये क्विंटल भी धान खरीदने वाला नहीं है. किसानों ने फसल को उगाने के लिए जो पूंजी लगाई है वो नहीं निकल पा रही है. बिहार की सरकार को भी किसानों की कोई चिंता नहीं है.

उन्होंने कहा कि सरकार साजिश के तहत मंडियां खत्म करना चाह रही है ताकि कुछ गिने चुने पूंजीपतियों को इसका लाभ मिल सके. जिस तरह नोटबंदी से लाखों लोगों का रोजगार छिन गया उसी तरह इन कानूनों से किसानों और मजदूरों की हालत खराब हो जाएगी.

कांग्रेस नेता ललन कुमार ने कहा कि इस लड़ाई में बिहार की जनता किसानों की लड़ाई के साथ खड़ी है, वहीं दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री चार उद्योगपतियों के साथ खड़े हैं. देश में जो हालात हैं उससे भुखमरी का संकट गहरा जायेगा.

ये सारी जिम्मेवारी केन्द्र सरकार पर होगी. पीएम मोदी के साथ चार उद्योगपति खड़े हैं उन्हें निर्णय करना है कि वे 130 करोड़ लोगों के साथ ये चार उद्योगपतियों के साथ रहेंगे.

संवाददाता सम्मेलन में विधायक फनीन्द्र चौधरी, समाजसेवी शिवम चौधरी, प्रखंड अध्यक्ष मो. मेराज आलम, प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष विभूति सिन्हा, रघुनंदन केसरी, मॉर्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के जिला सेक्रेटिएट सुभाष तांती, रवि कुमार, रिशु कुमार, वरिष्ठ नेता हिमांशु शेखर, चानो यादव, मो. मंराज आलम, प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष विभूति सिन्हा, तरूण चैधरी, राजद महिला जिलाध्यक्ष नीशु सिंह समेत महागठबंधन के सैकड़ों कार्यकर्त्ता मौजूद रहे.

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