नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं. शनिवार को किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नाम खुला ख़त लिखा. जिसमें उन्होंने कहा कि किसानों के विरोध प्रदर्शन ने विपक्षी पार्टियों को अपना पक्ष बदलने पर मजबूर कर दिया है, न कि विपक्षी पार्टियों के कारण किसान आंदोलन तेज हुआ है.

किसान संगठनों ने सरकार पर दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया. कहा कि सरकार आंदोलन के बारे में दुष्प्रचार कर रही है.

किसान संगठनों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद किसानों का मुद्दा सुलझाने के लिए सरकार अनौपचारिक तौर पर किसानों के कई संगठनों से बातचीत कर रही है. किसान संगठनों का कहना है कि सरकार के कृषि कानूनों से बड़ी कंपनियों को फायदा होगा न कि किसानों को.

दो दिन पहले कृषि मंत्री ने किसानों को खुला ख़त लिखा था. किसान संगठनों ने इसका उत्तर दिया और कहा कि उनकी मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए. वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी. जिसके बाद उन्होंने बताया था कि किसान नेताओं से अगले 2-3 दिनों में बातचीत हो सकती है.

वहीं नहर के पानी को लेकर मनोहर लाख खट्टर ने कहा कि मैं पंजाब के किसानों से अपील करता हूं कि वो सतलुज-यमुना लिंक नहर मामले को गंभीरता से लें.  हरियाणा के किसान सिंचाई ले लिए पानी की कमी से जूझ रहे हैं.

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