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केंद्र सरकार के नए कृषि कानून के खिलाफ किसान विगच 27 दिसंबर से दिल्ली के आसपास सीमाओं पर आंदोलनरत है. मोदी सरकार द्वारा दिए गए सभी प्रस्तावों को ठुकरा कर वो आंदोलन तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इन सबके बीच किसानों की गैरमौजूदगी में उनके बच्चे अपने खेतों की जिम्मेदारी संभालने के लि आगे बढ़ रहे हैं.

एक ऐसा ही उदाहरण हरियाणा के फतेहाबाद से सामने आया है जहां पर परिवार के सभी पुरुष किसान आंदोलन में भाग लेने गए हैं तो घर की महिलाओं ने खेतों में मोर्चा संभाल रखा है. फतेहाबाद के धारसूल गांव में घर की बेटियां और महिलाएं, कस्सी, फावड़ा आदि लेकर खेतीबाडी के कामों में जुटी हुई है.

पंजाब केसरी की एक रिपोर्ट के अनुसार गांव के सतीश कुमार मंडरना की 11 साल की बेटी को कस्सी के साथ खेतों में पर काम करते हुे देखा गया है. प्रिया के मुताबिक उनके पापा किसान आंदोलन में भाग लेने गए है ऐसे में वो खुद खेत में जाकर काम कर रही है ताकि फसल ना खराब हो.  प्रिया स्कूल जाती है और वो कक्षा 6 की स्टूडेंट है. मगर कोरोना के कारण स्कूल बंद होने की वजह से वो घर में ही पढ़ाई करती है. और समय निकालकर खेतों में भी काम करने जा रहा है.

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