अरुणाचल प्रदेश में पिछले दिनों 6 जेडीयू विधायक बीजेपी में शामिल हुए हैं. इसको लेकर अब जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी का बयान आया है. उनका कहना है कि गठबंधन की राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है. साथ ही कहा कि नीतीश कुमार संख्या बल के नहीं बल्कि साख के नेता हैं.

केसी त्यागी ने कहा कि वर्ष 1967 में डॉ लोहिया ने गठबंधन की राजनीति की शुरुआत की थी. इस गठबंधन की राजनीति तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में फली-फूली. 23 पार्टियों के गठबंधन की सरकार चली. किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया. अरुणाचल प्रदेश में उस अटल धर्म का भी पालन नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि अरुणाचल में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी जेडीयू थी. इस नाते भी जेडीयू ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया था कि मेरे विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए. पर अफ़सोस की बात है कि भाजपा ने मंत्रिमंडल में शामिल करने के बजाय अपनी पार्टी में ही हमारे विधायकों को मिला लिया. यह गठबंधन की बुनियादी भावना के भी खिलाफ है.

आगे उन्होंने कहा कि बिहार में 15 सालों से जीडीयू-भाजपा गठबंधन चल रहा है. इससे भी गठबंधन का पालन सीखना चाहिए. 15 साल में किसी भी कैबिनेट के निर्णय से किसी मंत्री को कोई शिकायत नहीं हुई.

केसी त्यागी ने कहा कि नीतीश कुमार संख्या बल के नेता नहीं बल्कि साख के नेता है. नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके आभामंडल को संख्या बल से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता है. नीतीश कुमार की साख में तनिक भी कमी नहीं आई है. कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में भी जीडीयू को पहले की तरह वोट मिले हैं.

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