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केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों का जमकर विरोध हो रहा है. किसान इन तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. सरकार बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की बात कह रही है और किसानों को आज तीन बजे बातचीत करने का समय दिया गया है. दिल्ली यूपी बॉर्डर पर भी किसान डटे हुए हैं.

जिला प्रशासन की धारा 144 के विरोध में किसानों ने धारा 288 लागू कर दी है. इस धारा को 32 साल बाद लगाया गया है. इस धारा के तहत किसानों के अलावा किसी भी व्यक्ति का प्रवेश उस क्षेत्र में वर्जित है. यूपी गेट पर किसानों ने झोपड़ी बनाकर गांव बसाना शुरू कर दिया है.

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किसानों का कहना है कि जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती तब तक हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा. किसानों के दिल्ली बॉर्डर के आसपास आने का सिलसिला अभी भी जारी है. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि वार्ता होने तक यूपी गेट पर हमारा धरना जारी रहेगा, असके आद आगे की रणनीति तय की जाएगी.

उन्होंने बताया कि धारा 288 किसानों की अपनी धारा है. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने साल 1988 में इस धारा का सबसे पहले इस्तेमाल किया था. इसके तहत पुलिस को किसानों ही हद में आने की मनाही थी. अगर आंदोलन में कोई अराजक तत्व आ जाए तो उसके खिलाफ किसान खुद कार्रवाई करते हैं.

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