पिछले एक साल में आलू की कीमतों में 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. आज आलू 45-50 रूपये किलो बिक रहा है. एक साल पहले आलू 20 से 25 रूपये किलो बिक रहा था. देश के प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, लखनऊ और अहमदाबाद में आलू की खुदरा कीमत क्रमशः 45, 48, 45, 40 और 50 रूपये प्रति किलो रही. यानि औसत 45 रूपये किलो.

पिछले साल नवम्बर महीने में इन शहरों में आलू की कीमत क्रमशः 25, 28, 25, 20 और 16 रूपये प्रति किलो रही थी, यानि औसतन कीमत 23 रूपये किलो थी. किसानों का कहना है कि इतना महंगा आलू उनके जीवन में कभी नहीं रहा.

प्याज के साथ आलू की बढ़ी कीमतों ने किचन का बजट बिगाड़ दिया है. इस साल के सितम्बर महीने में ही आलू की कीमतें ज्यादातर शहरों में थोक के भाव में 30 रूपये प्रति किलो या इससे भी अधिक हो गयी थीं. अब सवाल उठता है कि आखिर आलू इतना महंगा क्यों हो गया?

क्यों हुआ आलू महंगा?

भारत में आलू ठण्ड के महीनों में लगाया जाता है. साल 2019 के नवम्बर-दिसंबर से 2020 मार्च के बीच देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई. इस बारिश से आलू की फसल को काफी नुकसान पहुंचा. फरवरी 2020 तक जिन किसानों की आलू पाक गयी थी, उनक किसानों की जो कीमत मिली थी उसकी उम्मीद उन्होंने कभी नहीं की थी.

किसान बताते हैं कि करीब 10 साल बाद खुदाई के समय फरवरी में आलू की कीमत 900 से 1000 रूपये प्रति कुंतल रही. इससे पहले कई वर्षों में यह कीमत इस वक्त 400 से 500 रूपये प्रति कुंतल रहती थी.

किसानों ने जिस वक्त आलू की बुवाई शुरू की, तब बारिश शुरू हो गयी. सर्दियों में कई बार बारिश हुई. जिससे आलू के पौधे की बढवार रुक गयी. इस साल फरवरी और मार्च के शुरुआत में भी बारिश हुई थी. ख़राब मौसम की वजह से आलू का रकबा 8 से 10 फीसदी कम हुआ. यही वजह है कि आलू की कीमतें इस समय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी हैं.

रकबा कम होने से आलू का उत्पादन कम हुआ. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के मुताबिक साल 2019-20 के सीजन में अप्रैल 2020 तक आलू का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 140 लाख टन हुआ. 2018-19 में यही उत्पादन 150 लाख टन हुआ था. साल 2018-19 में देश में आलू उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 30 फीसदी थी. 2019-20 में यह घटकर 27 फीसदी रह गया.

कब तक होगा सस्ता?

आलू की कीमत नीचे लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है. केंद्र सरकार ने 31 जनवरी 2021 तक भूटान से बगैर लाइसेंस के आलू आयात की इजाजत दी है. विदेशी व्यापार निदेशालय ने अधिसूचना जारी कर अनुमति दी है.

आलू का आयत प्रतिबंधित श्रेणी में आता है, इसलिए इसके आयात के लिए लाइसेंस केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले डीजीएफटी से आयात करने की आवश्यकता होती है, लेकिन सरकार ने आलू आयात के नियमों में ढील देते हुए भूटान से बगैर लाइसेंस 31 जनवरी 2021 तक आयात करने की इजाजत दी है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here