डाक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ सफेद रंग का कोट पहनते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है इसका सीधा कनेक्शन मरीज और डाक्टर्स की सुरक्षा से जुड़ा है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सफेद रंग मेडिकल प्रोफेशन के प्रतीक के तौर पर माना जाता है इसकी शुरुआत 19 वीं शताब्दी से हुई थी, जानिए आखिर इसी रंग को क्यों चुना गया.

रिपोर्ट के मुताबिक कोट सफेद होने के कारण ये संक्रमण से बचाता है, सफेद कोट पर खून और केमिकल के निशान आसानी से दिख जाते हैं इस तरह मरीज से डाक्टर्स और दूसरे लोगों तक संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है इस पर ब्लड या किसी दूसरे केमिकल का निशान दिखने पर इसे बदला जा सकता है.

संक्रमण से बचने के अलावा भी सफेद कोट पहनने की कई वजह होती हैृ ये कोट दर्शाता है कि इसे पहनने वाला इंसान डाक्टर या मेडिकल स्टाफ है इससे मरीज इन्हें बेहतर तरीके से पहचान पाते हैं इसके अलावा सफेद कोट स्वच्छता का प्रतीक भी है.

आखिर डाक्टर क्यों पहनते हैं सफेद कोटः

सफेद कोट पर डाक्टर्स की क्या राय है इस पर भी सर्वे किया गया है. BMJ जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, 400 मरीजों और 86 डाक्टर्स पर सर्वे किया गया. उनसे सवाल-जवाब पूछे गए. रिपोर्ट में सामने आया कि डाक्टर्स मानते हैं कि सफेद कोट पहनने से ही 70 फीसदी तक संक्रमण रुकता है.

वहीं सफेद रंग के कोट को लेकर मरीज क्या सोचते हैं इस पर भी एक रिसर्च की गई. रिसर्च में खासकर बुजुर्गों को शामिल किया गया. रिसर्चे के नतीजे कहते हैं कि बुजुर्गों को लगता है कि सफेद रंग बुद्धिमत्ता का प्रतीक है. डाक्टर्स के सफेद कोट पहनने से मरीज सहज महसूस करते हैं और उनमें कांफिडेंस आता है.

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