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सुप्रीमकोर्ट ने कृषि कानूनों पर सोमवार को सुनवाई करते समय सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि क्या वो कानून को स्थगित करती है या वो ही इस पर रोक लगा दे. शीर्ष अदालत की ओर से कहा गया कि किसानों की चिंताओं को कमेटी के सामने रखे जाने की जरुरत है कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सरकार के विवाद निपटाने के तरीके पर नाराजगी जताई है.

सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र से कहा कि हम नहीं समझते हैं कि आपने इस मामले को सही तरीके से हैंडल किया है. इस दौरान किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि हम 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च नहीं करने जा रहे है उन्होंने कहा कि इतना महत्वपूर्ण कानून कैसे संसद में बिना बहस के ध्वनि मत से पास किया गया.

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें खुशी हुई कि ये दवे की ओर से कहा गया. सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि प्रर्दशन के खिलाफ नहीं है लेकिन अगर कानून पर रोक लगा दी जाती है तो किसान क्या प्रर्दशन स्थल से अपने घर को लौट जाएंगे?

सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि किसान कानून वापस करना चाहते हैं जबकि सरकार मुद्दों पर बात करना चाहती है हम अभी कमिटी बनाएंगे और कमिटी की बातचीत जारी रखने तक कानून के अमल पर हम स्टे करेंगे. सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि हम प्रस्ताव करते हैं किसानों के मुद्दों के समाधान के लिए कमिटी बने. हम ये भी प्रस्ताव करते हैं कानून के अमल पर रोक लेंगे. इस पर जिसे दलील पेश करना है कर सकता है.

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