कभी कभी ऐसा होता है कि बहुत मेहनत करने के बाद भी हम ज्यादा कामयाब नहीं हो पाते मगर कभी कभी किस्मत ऐसी करवट लेती है कि एक साधारण इंसान कब खास हो जाता है किसी को पता ही नहीं चलता. ये सब मेहनत के साथ साथ किस्मत पर भी निर्भर करता है. ऐसे ही एक साधारण से डिलिवरी बॉय ने मेहनत और संघर्ष के दम पर अपनी खुद की कंपनी खड़ी कर दी. आज उनके देश के कई बड़े शहरों में 15 आउटलेट्स हैं.

ये कहानी है दिल्ली के रहने वाले सुनील कुमार की जो एक साधारण परिवार से आते हैं. आर्थिक स्थिती ठीक न होने की वजह से उन्होंने इंटरमीडिएट तक ही पढ़ाई की. इस दौरान सुनील ने शादियों में जाकर वेटर का भी काम किया. इसके बाद उन्होंने एक कुरियर एजेंसी में काम करना शुरू कर दिया.

सुनील यहीं नही रूके और उन्होंने डोमिनोज पिज्जा में नौकरी के लिए आवेदन किया. दो बार रिजेक्ट होने के बाद तीसरी बार सुनील का यहां सिलेक्शन हो गया और वो डिलिवरी बॉय बन गए. मेहनत और गलन से काम करने की वजह से सुनील को तरक्की मिलती गई और वो जूनियर मैनेजर के पद तक पहुंच गए.

इस दौरान सुनील की शादी हो गई. साल 2003 में सुनील की पत्नी मां बनने वाली थी और वो अस्पताल में भर्ती थी. सुनील ने अपने सीनियर से छुट्टी मांगी मगर छुट्टी उन्हें मिली नहीं. सुनील बिना बताए घर आ गए तो कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया. इसके बाद सुनील ने ये तय कर लिया कि अब वो किसी के पास नौकरी नहीं करेंगे.

सुनील ने दिल्ली में जेएनयू के बाहर फूड स्टॉल लगाना शुरू कर दिया. स्टॉल अभी कुछ चला ही था कि दुकानदारों की शिकायत के बाद उनके स्टॉल को वहां से हटा दिया गया. इसके बाद साल 2007 में उन्होंने फ्लाइंग केक के नाम से अपनी बेकरी शुरू कर दी.

इस दौरान उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, कभी घर के जेवर बेचने पड़े तो कभी उधार लेकर काम चलाना पड़ा. कुछ दिनों के बाद उनकी दुकान चल पड़ी और उन्हें ऑर्डर पर ऑर्डर मिलने लगे. आज उनके दिल्ली, गुरूग्राम, नोएडा, पुणे, बिहार जैसी जगहों पर उनके आउटलेट्स हैं.

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