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संजूरानी जो कि मेरठ के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है उनके परिवार में कोई भी ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था इसके साथ ही वो जिस समाज से आती है तो समाज शिक्षा के प्रति ना तो सजग है बल्कि इस समाज के लोग रुढ़िवादी सोच के लिए जाने जाते हैं इसी रुढ़िवादी सोच का सामना मंजू को भी करना पड़ा. हालांकि वो अपने आपको भाग्यशाली मानती है कि वो अपने घर में सबसे बड़ी बेटी नहीं है. नहीं तो उनकी शादी कर दी गई होती.

उनकी बहन की शादी स्कूली शिक्षा के दौरान ही कर दी गई थी जिसके बाद संजू को भी लगने लगा था कि आगामी दो से तीन सालों में उसकी भी शादी कर दी जाएगी. कहा कि मैंने शुरुआत से ही यूपीएससी एग्जाम को क्लियर कर कलेक्टर बनने का सपना देखा था जिसे उन्हें पूरा करना था.

लेकिन वो जिस समाज से ताल्लुक रखती हैं उस समाज में लड़कियों को ज्यादा पढ़ाना लिखाना उचित नहीं समझा जाता है और 20 साल की उम्र में ही लड़कियों की शादी कर दी जाती है.

लेकिन उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए परिवार के साथ-साथ समाज के भी ताने सुने. कालेज के खत्म होने के साथ ही घरवाले शादी करने का दबाव बनाने लगे लेकिन उनका सपना कलेक्टर बनने का था. साल 2013 में जब वो 28 साल की थी, इस दौरान उनकी मां का देहांत हो गया.

उस समय संजू मेरठ के आरजी डिग्री कालेज से स्नातक कर चुकी थी और दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीजी कर रही थी, परिवार के तानों की वजह से उनका पढ़ाई में भी मन नहीं लगता था इसलिए उन्होंने इस दौरान घर छोड़ने का फैसला किया. इस दौरान उन्होंने घर को छोड़ दिया और किराए पर कमरा लेने का फैसला किया. प्राइवेट स्कूल में टीचिंग की. पहले ही प्रयास में उन्होंने एग्जाम को क्लियर किया और टैक्स आफीसर के पद पर काबिज है, हालांकि उनका सपना अब जिलाधिकारी बनने का है उसके लिए वो प्रयत्नरत हैं.

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