मृत्यु के बाद क्या होता है? ये एक ऐसा सवाल है जिसका स्पष्ट और सटीक उत्तर आपको धर्मग्रंथों से प्राप्त हो सकता है. 18 पुराणों में सबसे प्रमुख गरुड़ पुराण के भीतर जीवन और मृत्यु के अलावा मृत्यु के पश्चात होने वाली स्थिति का वर्णन भी मौजूद है.

लेकिन धर्मग्रंथों में लिखी बातों को मिथक और मन बहलाने का जरिया मानने और वैज्ञानिक तथ्यों की पैरवी करने वाले लोग इन बातों पर विश्वास नहीं करते, जब तक उन्हें कोई प्रमाण नहीं मिल जाता वो किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहते.

विज्ञान की परेशानीः

यही कारण है कि सदियों से इस बात पर रिसर्च और विभिन्न शोध किए जा रहे हैं कि मृत्यु के बाद जब शरीर यहां रह जाता है तब आत्मा को कैसा महसूस होता है दुनिया के बड़े-ब़़ड़े वैज्ञानिक और शार्प माइंडेड लोग भी अभी तक इस पहेली को नहीं सुलझा पा रहे हैं कि शरीर को छोड़ने के बाद आत्मा कहां जाती है.

सवालों का जवाबः

अंग्रेजी वेबसाइट रेडिट पर इसी से संबंधित एक थ्रेड चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत उन लोगों से सवाल किए जा रहे हैं जिन्होंने किल्निकली डेड यानि साइंस द्धारा मृत घोषित हो जाने के बाद पुनः जीवन प्राप्त किया है.

इस थ्रेड के अंतर्गत लोगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, एक वो जिन्हें डेड होने के बाद कुछ भी महसूस नहीं हुआ, दूसरे वो जो मरने के बाद किसी अन्य व्यक्ति से बात कर रहे थे और तीसरे वो जिन्होंने कुछ अलग अनुभव किया, जैसे रोशनी देखी या कुछ अन्य घटना घटित हुई.

वास्तविक अनुभव-1

एक यूजर ने बताया कि जब वो एंजियोग्राफी के लिए गया था तो कुछ देर तो सब ठीक चल रहा था, लेकिन एक समय बाद अचानक डाक्टर दिखने बंद हो गए. उसका कहना था कि मैं जिस कमरे में लेटा था, वहां अचानक से अंधेरा छा गया.

मुझे आसपास की कोई भी आवाज सुनाई दे रही थी. सब एक दम शांत सा हो गया था, इतनी शांति मैंने जीवन में कभी अनुभव नहीं की थी, मेरे भीतर एक संतुष्टि थी ना कोई हलचल ना कोई तनाव. अचानक से ऐसा लगा कि किसी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे उठाया अपने साथ चलने के लिए मुझे तैयार कर लिया. लेकिन जैसे ही मुझे उठाया मेरा हाथ जोर से झटककर छोड़ दिया और फिर अचानक से डाक्टरों की आवाज आने लगी हमने बचा लिया.

वास्तविक अनुभव-2

मेडिकली डेड घोषित होने के बाद पुनः जीवित होना किसी चमत्कार से कम नहीं है एक यूजर लिखता है मैं अपनी क्लास में पढ़ रहा था कि अचानक मुझे दिल में दर्द हुआ और कुछ ही समय बाद एक अजीब सी शांति का अनुभव होने लगा. आसपास सिवाय अंधेरे के कुछ नहीं था.

समझ नहीं आ रहा था कि मेरे स्टूडेंट्स कहां गए.थोड़ी देर बाद एक रोशनी सी मेरे चेहरे पर पड़ने लगी, सबकुछ चमकने जैसा था. ऐसा लगा मैं उस रोशनी की तरफ गिर रहा हूं. अचानक मुझे एक आवाज आई और मैंने तुंरत अपनी आंख खोली. डाक्टर के अनुसार उस दौरान मेरे दिल ने काम करना बद कर दिया था.

वास्तविक अनुभव-3

तीसरे यूजर ने लिखा वो काफी हैरान कर देने वाला था, काफी पुरानी बात है कि मैं एक मीटिंग के लिए बाहर गया हुआ था मीटिंग के दौरान ही मैं गिर गया और करीब 5 मिनट के लिए मेरी पल्स और हार्ट बीट दोनों बंद हो गए थे मुझे मेडिकली डेड घोषित किया गया था लेकिन उस 5 मिनट में मेरे साथ जो हुआ वो हैरान कर देने वाला था, मुझे वो याद है कि मुझे एंबुलेंस में जा रहे थे और मैं खुद अपनी डेड बाडी के पास बैठा. मेरे आपसाप कोहरा और अंधेरा था. मैंने वहां अपने बेस्ट फ्रेंड को देखा जो मेरे सथ ही आकर बैठ गया.

वापस जाने की इच्छाः

हैरानी की बात ये है कि 3 साल पहले ही मेरे उस फ्रेंड की डेथ हो गई थी. उसने मुझे कहा कि अगर तुझे वापस जाना है तो कोशिश करनी होगी, नहीं तो तू भी यही रह जाएगा, मैंने हार नहीं मानी और अपने शरीर में जाने की कोशिश की. अचानक मेरी आंख खुली और मैंने अपनी मां को अपने पास बैठे देखा. उन्होंने मुझे बताया कि मेरा जीवित होना एक चमत्कार है.

मृत्यु से जुड़ी मान्यताएंः

दुनिया में जितने धर्म है उतनी ही मान्यताएं भी मौजूद है. उनमें से बहुत सी मान्यताएं मरने के बाद आत्मा की स्थिति और उसकी यात्रा से जुड़ी है, बहुत से लोग स्वर्ग और नर्क की बातों पर विश्वास करते हैं तो कुछ इन दोनों के होने की बात तक को नकार देते हैं.

आत्मा परिवार के बीच रहती है मौजूदः

बहुत से लोग ये मानते हैं कि मृत्यु के बाद आत्मा को अपने पूर्वज दिखाई देते हैं. मृत्यु पश्चात 13 दिनों तक आत्मा अपने परिवार के साथ ही रहती है, वो भले ही उनसे बात नहीं कर पाए लेकिन वो उन्हं देखती है और कई बार उन्हें अपने होने का अनुभव भी करवाती हैं.

निजी अनुभवों का प्रभावः

इस तरह की बहुत सी घटनाओं को हमने कई बार पढ़ा और देखा हैं, लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने निजी अनुभवों को शब्द देता है तो निश्चित रुप से वे ज्यादा प्रभावकारी साबित होते हैं. धर्मग्रंथों से इस बात का उल्लेख मिलता है कि आत्मा का एक शरीर में वास केवल निर्धारित समय के लिए हो होता है.

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