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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के दिग्गज नेता अहमद पटेल का बुधवार को निधन हो गया. अहमद पटेल जो कि कोरोना से संक्रमित थे वे पिछले करीब एक महीने से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे, तीन बार लोकसभा और पांच बार राज्यसभा के सांसद रहे अहमद पटेल की गिनती कांग्रेस के बड़े संकटमोचक नेता के तौर पर की जाती थी.

कांग्रेस के सामने कई बार ऐसे मौके आए जब अहमद पटेल ने पार्टी को संकट से उबारा. आखिरी राज्यसभा चुनाव में भी अहमद पटेल ने बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की ऱणनीति को फेल कर दिया था. अगस्त 2017 में हुए राज्यसभा चुनाव में के दौरान अमित शाह जो कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. और पार्टी ने इस दौरान अहमद पटेलको हराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

दरअसल इस समय बीजेपी की ओर से तीन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था. गुजरात की तीन सीटों पर अमित शाह, स्मृति ईरानी, और कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में आए बलवंत सिंह राजपूत को मैदान में उतारा था. बीजेपी के पास दो सीटें जीतने के लिए तो विधायकों की पर्याप्त संख्या थी लेकिन तीसरी सीट पर मुकाबला उस समय दिलचस्प हो गया जब कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पार्टी के ही खिलाफ बगावत कर दी.

ऐसे में अहमद पटेल के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया. राज्यसभा चुनाव के दौरान बलवंत सिंह राजपूत के साथ कांग्रेस के 6 विधायकोंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था इनमें से तीन विधायक बीजेपी में भी शामिल हो गए थे इसके बाद 182 सीट वाली गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या कम हो गई और इस दौरान पार्टी के सामने संकट खड़ा हो गया.

क्रास वोटिंग के ड़़र को लेकर अहमद पटेल को अपनी सीट बचाने का भी ड़र सताने लगा. चुनाव के दौरान कांग्रेस के दो विधायकों ने क्रास वोटिंग की, इसके बाद पार्टी पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग के पास पहुंच गई.

चुनाव आयोग को दी गई अपनी शिकायत में कांग्रेस की ओर से ये आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के दो विधायकों भोलाभाई गोहिल और राघवभाई पटेल ने अपना वोट बीजेपी उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को देने से पहले अमित शाह को अपना बैलेट पेपर दिखाया जो कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद इन दोनों लोगों के वोट को अवैध घोषित कर दिया गया.

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