मां की ममता को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है. उड़ीसा से ममता की एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है, जोकि मानवता के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. महिला कांस्टेबल ने ऐसा काम किया है जिसकी सराहना हर तरफ़ हो रही है. भूख से रोटी बिलखती मसूब बच्ची को चुप कराया. बच्ची की मां उस वक्त परीक्षा दे रही थी. ममता की ये तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
इस महिला कांस्टेबल का नाम बसंती चौधरी है. यह वाक़या उड़ीसा के मलकानगिरी ज़िले में देखने को मिली है. चार माह की बच्ची के साथ मां परीक्षा देने आइ थी. परीक्षा सिपाही भर्ती की थी. 22 वर्ष की महिला चंचला मलिक परीक्षा देने आयी थीं. उनके साथ 4 महीने की नवजात बच्ची भी थी. चंचला के साथ उसके परिवार का कोई सदस्य नहीं था, वह अकेले ही बच्ची को सम्भालते हुए परीक्षा केंद्र तक पहुंची.
चंचला ने अपनी बच्ची को सम्भालने के लिए परीक्षा केंद्र पर मां को बुलाया था, मगर मां वहाँ नहीं पहुंची. चंचला इंतज़ार करती रहीं लेकिन उनकी मां परीक्षा केंद्र पर नहीं आयीं. परीक्षा हॉल में प्रवेश का समय निकल रहा था. ऐसे में चंचला बेहद परेशान हो गयी. आख़िर वह अपनी मासूम बच्ची को कैसे छोड़कर परीक्षा देने जाएँगी.
ऐसे में ड्यूटी पर तैनात महिला सिपाही बसंती चौधरी ने बच्ची सम्भालने का ज़िम्मा उठाया. चंचला के परीक्षा हॉल में प्रवेश के बाद मासूम बच्ची को भूख लगी और वह रोने लगी. ऐसे में सिपाही बसंती से रहा नहीं गया और मासूम बच्ची को अपना दूध पिला दिया. महिला सिपाही की इस ममता की हर कोई तारीफ़ कर रहा है. इस तरह की मदद अब कम ही देखने को मिलती है. सिपाही बसंती ने जो किया वह ना सिर्फ़ सराहना के योग्य है बल्कि एक मिसाल भी है. ऐसी स्थिति में भी परीक्षा देने जाना इसको लेकर चंचला की भी सराहना की जी रही है.

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